अपनी स्थापना के पहले दशक से ही कॉनकॉर के व्यवसाय में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे देश के अन्दर उच्च स्तर पर कंटेनरीकृत कार्गो के आवागमन में वृद्धि हुई है। इस प्रकार की कंटेनरीकृत सेवाओं को सुगमता से उपलब्ध कराने से इसके बाजार शेयर में वृद्धि हुई है। आरम्भ में ही इस प्रकार हुई वृद्धि से यह अनुभव होता है कि नई सहस्त्राबदी के आरम्भिक वर्षों में ही कॉनकॉर आयात निर्यात तथा आन्तरिक, दोनों प्रकार के व्यवसाय में एक शक्तिशाली संभारतंत्र सेवाएं मुहैया कराने वाली कम्पनी के रूप में उभरेगी। इससे कॉनकॉर का परिचालानत्मक अस्तित्व बाजार के अनुरूप चलायमान संगठन के रूप में परिवर्तित हो जाने का व्यावसायिक स्वरूप स्वतः स्पष्ट होने लगेगा। आयात-निर्यात तथा देश के व्यवसाय के आन्तरिक क्षेत्र की ओर ध्यान केन्द्रित करना इनकी परस्पर वृद्धि की संभाव्यता तथा लाभप्रदता के ऊपर निर्भर है। अब जबकि कॉनकॉर अपनी विशेषज्ञता एवं अनुभव का क्षेत्र स्वयं निर्मित करेगा, वह लाभप्रदत व्यावसायिक उद्यमों में संभाव्य सहयोगियों की शक्तियों को भी सुगठित करेगा।
साधारणतः यह माना जाता है कि पत्तन के यातायात का 30 प्रतिशत भाग पतन के 300 कि मी के दायरे में ही बनता है। शेष 70 प्रतिशत यातायात सुदूर प्रदेशों के लिए होता है।यदि हमारी पैठ अन्तर्देशीय स्तर पर शत प्रतिशत हो जाए तो पत्तनों पर संचालित होने वाले यातायात में कॉनकॉर की हिस्सेदारी भविष्य में 70% त्क बढ सकती है वर्तमान में इसकी 30% हिस्सेदारी है जिसके और बढ़ने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। आयात निर्यात क्षेत्र में कॉनकॉर की योजना पूरे भारत में योजनागत स्थानों पर कुछ बड़े तथा अनेक छोटे टर्मिनलों का निर्माण कर सीमाशुल्क सहित ढुलाई टर्मिनल परिचालन एवं भण्डारण क्षमता बढ़ाने की है। कॉनकॉर कंटेनर संचालित करने वाले कुछ मुख्य पत्तनों पर नीतिगत रूप से भी मौजूदगी सुनिश्चित करेगा जिससे कि यातायात मार्गों के दोनों सिरों को जोड़ा जा सके। नए रेल फ्लैट कारों के अधिग्रहण से सही अर्थों में रेल ढुलाई प्रभार और परिवहन समय कम होगा।
आन्तरिक (डोमेस्टिक) व्यवसाय हेतु कॉनकॉर प्रगामी विपणन प्रयासों द्वारा कंटेनरों में ढोने योग्य साधारण माल कार्गो के सार्थक भाग को वापस रेल मार्ग द्वारा ढोने के लिए प्रतिबद्ध है। इस क्षेत्र में मुख्य स्पर्धा ट्रक द्वारा सड़क मार्ग से कार्गो की ढुलाई से है। चूंकि हम नियंत्रित परिवहन समय तथा समग्र विश्वसनीयता के अतिरिक्त बेहतर संरक्षण मुहैया कराते हैं, हम समझते हैं कि उस यातायात को जो अभी सड़क मार्ग का प्रयोग करता है आकर्षित करने में हम सक्षम हैं। आज आन्तरिक व्यवसाय में वृद्धि की अपार संभावनाएँ हैं। चूंकि उपभोक्ता केन्द्र उत्पादन केन्द्रों से बहुत दूरी पर हैं, अतः यातायात की सदैव बड़ी मांग रहेगी। उच्च क्षमता वाले उपभोक्ता सामान निर्मित करने वाले उद्योगों के स्थापित होने से भी यह संकेत मिलता है कि खुदरा सामान के यातायात में थोक यातायात की अपेक्षा तीव्र विकास की संभावना है जिससे दोनों की हिस्सेदारी वर्तमान में 35 : 65 अनुपात से बढ़कर 50 : 50 होने की आशा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस खुदरा यातायात का अधिकांश भाग कंटेनरीकरण योग्य है और आन्तरिक क्षेत्र में कॉनकॉर के लिए विशाल बाजार संभावनाएं प्रदर्शित करता है।
आन्तरिक यातायात को आकर्षित करने के लिए कॉनकॉर की अब तक मुख्य नीति विभिन्न स्थानों के मध्य नियमित अनुसूचित रेल सेवाएं चलाने की रही है। इन कॉन्ट्रेक सेवाओं का कई और मूल गंतव्य स्थानों तक विस्तार किया जाएगा। नए अधिग्रहीत ‘रोलिंग स्टॉक’ के प्रयोग से बेहतर दक्षता लाई जाएगी। सेवाओं को ग्राहकोन्मुख बनाकर विशिष्ट कार्गो एवं निगमों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा तथा अपेक्षाकृत बृहद्र टर्मिनल नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।
अन्तर्राष्ट्रीय और आन्तरिक व्यवसाय दोनों के विकास के लिए नीति का मुख्य पक्ष हब स्पोक प्रणाली का लागू करना है ताकि कॉनकॉर के आन्तरिक संभारतंत्र के अनुरूप ग्राहक को उसके द्वार पर ही सम्पूर्ण सेवा उपलब्ध कराई जा सके। सेवा अनुकूलक होते हुए भी आगे बढ़ने के प्रयास के लिए कॉनकॉर अपने मुख्य व्यवसाय के क्षेत्र में भण्डारागारण, वातानुकूलित कार्गो का आवागमन और अन्य मूल्ययोजित सेवाओं का विस्तार करके ‘थर्ड पार्टी लॉजिस्टिक्स’ सेवा मुहैया कराने की दिशा में अग्रसर होगा। बाजार में भागीदारी बढ़ाने हेतु समग्र नीति के रूप में कॉनकॉर बहुविध यातायात तथा अपने संभावित ग्राहकों को संभारतंत्र परामर्शदात्री सेवाएँ मुहैया कराने की ओर भी ध्यान देगा। ये सीधे ही पोतवणिक (शिपर्स) अथवा मध्यवर्ती एजेन्सियाँ यथा शिपिंग लाइन्स फारवर्डिंग एजेन्ट, टर्मिनल ऑपरेटर आदि हो सकते हैं। यहाँ तक कि सरकारी संस्थानों एवं निजी व्यावसायिक संगठनों, वाणिज्य संघों आदि को भी संभाव्य ग्राहकों के रूप में लक्ष्य बनाया जा सकता है।
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